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किरन Class 5 Summary Explanation in Hindi Chapter 1

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Teachers often provide Class 5 Hindi Notes Veena Chapter 1 किरन Summary in Hindi Explanation to simplify complex chapters.

किरन कविता Class 5 Summary in Hindi

किरन Class 5 Hindi Summary

किरन कविता का सारांश

इस कविता में बालिका और सूर्य की किरन के मध्य प्यारी – सी बातचीत होती है। बालिका किरन से हैरानी से पूछती है की आज इतनी जल्दी क्यों आ गई जबकि वह तो अभी तक बिस्तर से उठी भी नहीं है। वह बताती है कि कल शाम तक वह किरण के साथ बहुत सारे खेल खेलती रही थी। फिर जब किरन सोने चली गई तो वह अकेली रह गई ।

बालिका को देर तक नींद नहीं आई थी। फिर वह कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते बहुत देर से सो पाई थी। जब बालिका अपनी बात समाप्त करती है तो किरन उसे बताती है कि वह रात को सोती नहीं है बल्कि एक दूसरी दुनिया में चली जाती है। वहाँ वह सोए हुए बच्चों को जगाती है जब शाम हो जाती है तो वह फिर लौटकर यहाँ आ जाती है।

किरन Class 5 Summary Explanation in Hindi Chapter 1 1

किरन Class 5 Summary in Hindi

  • इस कविता को पढ़ने के उपरांत बच्चे प्रकृति से संबंध स्थापित करने में सक्षम होंगे। • विद्यार्थी सूर्य के प्रकाश तथा उसकी किरणों के बारे में जान पाएँगे।
  • इस कविता से विद्यार्थी परिश्रम का महत्व भी सीख पाएँगे। बच्चों को किरण के समान मेहनत करने की प्रेरणा मिलेगी।
  • इस कविता के माध्यम से विद्यार्थी अपनी दुनिया ( भारत देश) तथा दूसरी दुनिया (विदेश-अमेरिका, लंदन इत्यादि) के समय के अंतर को भी जान पाएँगे।
  • सूर्य के महत्व को जानने के साथ-साथ विद्यार्थियों के मन में प्रकृति के प्रति सकारात्मक सोच उत्पन्न (पैदा) होगी।

प्रस्तुत कविता के कवि निरंकार देव ‘सेवक’ हैं। इस कविता में एक बालिका किरन (सूरज की रोशनी) से बातचीत (संवाद) कर रही है। बालिका किरन से कहती है कि तुम आज बहुत ही जल्दी उठकर आ गई हो और मैं तो अभी बिस्तर से भी बाहर नहीं आई हूँ अर्थात् उठी ही नहीं हूँ। मैंने कल शाम तुम्हारे साथ बहुत से खेल खेले थे पर फिर तुम सोने के लिए चली गई और मैं अकेले ही रह गई थी। तुम तो बहुत आराम से सोई होगी किंतु मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी।

परी-कथाएँ पढ़ते-पढ़ते मुझे काफी देर बाद नींद आई। यह सुनकर किरन ने उसे बताया कि मैं तो सो ही नहीं पाती हूँ। पहले मैं तुम्हें सुलाती हूँ फिर तुम्हारे सोने के बाद मैं दूसरी दुनिया में चली जाती हूँ। (यहाँ किरन के कहने का यह भाव है कि दुनिया के जिस हिस्से में उस समय दिन होता है, किरन वहाँ चली जाती है।) वहाँ जाकर सोए हुए बच्चों को उठाती हूँ और फिर उन्हें जगाकर शाम होने पर दोबारा यहाँ तुम्हारे पास लौट आती हूँ।

इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि- हम सभी को अपने नियत समय अर्थात सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। क्योंकि प्रकृति के सारे काम समय से ही होते हैं अतः हमें भी अपने कार्य को समय से करना चाहिए ।

किरन कविता हिंदी भावार्थ Pdf Class 5

किरन सप्रसंग व्याख्या

1. अरी किरन तू उठकर इतनी
जल्दी आज चली आई।
मैं तो बिस्तर में से अपने
अब तक निकल नहीं पाई।

कल तो तेरे साथ शाम तक
खेल बहुत से खेली मैं ।
पर जब तू चल दी सोने को
तो रह गई अकेली मैं।

तू सुख से सोई होगी पर
मुझको नींद नहीं आई।
परी कथाएँ पढ़ते-पढ़ते
बड़ी देर में सो पाई।

शब्दार्थ –

किरन – प्रकाश की चमक या रोशनी,
बिस्तर – बिछौना, जिस पर व्यक्ति सोता या आराम करता है,
सुख – आनंद, आराम,
कथाएँ – कहानियाँ, किस्सा |

प्रसंग – प्रस्तुत पक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा – 5’ में संकलित कविता ‘किरन’ से ली गई हैं। इस कविता के कवि निरंकार देव ‘सेवक’ हैं। यह कविता सूर्य की किरन के बारे में है जो अपनी रोशनी से दुनिया को रोशन करती है।

व्याख्या- इन पंक्तियों में एक बालिका किरन से कहती है कि तुम आज इतनी जल्दी उठकर आ गई हो जबकि मैं तो अभी तक बिस्तर से ही बाहर नहीं निकली हूँ । कल शाम तक मैंने तुम्हारे साथ बहुत-से खेल खेले और जब तुम सोने चली गई तो मैं अकेली हो गई थी। तुम आराम से सोई होगी पर मुझे तो नींद नहीं आई फिर परी की कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते बहुत देर से मैं सो पाई।

2. कहने लगी किरन यह सुनकर
मैं ही कब सो पाती हूँ।
तुम्हें सुलाकर एक दूसरी
दुनिया में मैं जाती हूँ।

बच्चे जो बिस्तर में सोए
होते, उन्हें जगाती हूँ।
वहाँ शाम हो जाती है तो
लौट यहाँ फिर आती हूँ।

शब्दार्थ –
दुनिया – विश्व, संसार ।
लौटना – वापस आना ।
शाम – संध्या, साँझ ।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा – 5’ में संकलित कविता ‘किरन’ से ली गई हैं। इस कविता के कवि निरंकार देव ‘सेवक’ हैं। इन पंक्तियों में बालिका की बातें सुनकर किरन उनका जवाब देती है ।

व्याख्या – किरन बालिका से कहती है कि मैं कभी भी नहीं सोती हूँ। तुम्हें सुलाकर मैं एक दूसरी दुनिया में जाती हूँ। उस दुनिया में जो बच्चे सोए हुए होते हैं, उन्हें जगाती हूँ और जब वहाँ शाम हो जाती है तो यहाँ वापस लौट आती हूँ। इन पंक्तियों के द्वारा कवि कह रहे हैं कि पृथ्वी पर सभी स्थान पर एक साथ रात – दिन नहीं होता है। सभी स्थान का समय अलग-अलग होता है।

किरन Class 5 Summary Explanation in Hindi Chapter 1 2

Class 5 Hindi Chapter 1 Summary किरन

अरी किरन त उठकर इतनी
जल्दी आज चली आई।
मैं तो बिस्तर में से अपने
अब तक निकल नहीं पाई।

कल तो तेरे साथ शाम तक
खेल बहुत से खेली मैं।
पर जब तू चल दी सोने को
तो रह गई अकेली मैं।

तू सुख से सोई होगी पर
मुझको नींद नहीं आई।
परी कथाएँ पढ़ते-पढ़ते
बड़ी देर में सो पाई।

कहने लगी किरन यह सुनकर
मैं ही कब सो पाती हूँ।
तुम्हें सुलाकर एक दूसरी
दुनिया में मैं जाती हूँ।

बच्चे जो बिस्तर में सोए
होते, उन्हें जगाती हूँ।
वहाँ शाम हो जाती है तो
लौट यहाँ फिर आती हूँ।
– निरंकार देव ‘सेवक’

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