Measurement of Length and Motion Class 6 Notes in Hindi
लंबाई एवं गति का मापन Class 6 Notes
कक्षा 6 विज्ञान नोट्स Chapter 5 लंबाई एवं गति का मापन – कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 5 नोट्स
→ मात्रकों की अंतरराष्ट्रीय प्रणाली (SI मात्रकों) को देशों द्वारा मापन के मानक मात्रकों के रूप में स्वीकार किया गया है।
→ लंबाई का SI मात्रक मीटर है। इसका प्रतीक m है।
→ 1 km = 1000 m, 1 m = 100 cm, 1 cm = 10 mm

→ जब दूरी किसी निश्चित वस्तु या बिंदु के सापेक्ष बतायी जाती है, तब इस बिंदु को संदर्भ बिंदु कहते हैं।
→ एक वस्तु को गतिमान में तब कहा जा सकता है, जब उसकी स्थिति किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ परिवर्तित होती है।
→ जब कोई वस्तु सरल रेखा के अनुदिश गति करती है, तब उसकी गति को सरल रेखीय गति कहते हैं।
→ जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ के अनुदिश गति करती है, तब उसकी गति को वृत्तीय गति कहते हैं।
→ कोई वस्तु किसी नियत स्थिति के इधर-उधर गति करती है, तब उसकी गति को दोलन-गति कहते हैं।
दीपा एक जिज्ञासु बालिका है। वह 11 वर्ष की है और हरियाणा प्रांत के एक नगर में रहती है। विद्यालय का नया सत्र आरंभ हो चुका है। दीपा को विद्यालय के लिए नई वर्दी चाहिए क्योंकि उसका कद बढ़ गया है। उसकी माँ उसे एक कपड़े की दुकान पर ले जाती हैं। वह दो मीटर कपड़े का टुकड़ा माँगती हैं। दुकानदार एक धातु की माप छड़ से उस कपड़े को मापता है।

उसके बाद दर्जी लचीले मापन-फीते से दीपा की वर्दी का माप लेता है। उसकी माँ दर्जी से कहती हैं कि वर्दी की लंबाई चार अंगुल (चार अँगुली की चौड़ाई के बराबर) अधिक रखे।

दीपा अपने अनुभव विद्यालय के मित्रों अनीश, हरदीप, पद्मा एवं तस्नीम के साथ साझा करती है और इससे उनके बीच चर्चा आरंभ हो जाती है।

हम कैसे मापते हैं? Class 6 Notes
हरदीप कहता है, “मैंने अपनी दादी माँ को अपने हाथ की लंबाई से कपड़ा मापते हुए देखा है।”
“क्या आपने कभी किसी किसान को अपने खेत की क्यारियाँ बनाने के लिए खेत की लंबाई मापते हुए देखा है? वह चलता जाता है और अपने कदमों की संख्या गिनता जाता है”, पद्मा कहती है।
“अरे, कदम ही नहीं, कभी-कभी वे मापने के लिए अपने पैर के पंजे की लंबाई का भी उपयोग करते हैं”, अनीश ने कहा।

दीपा उत्साह से कहती है, “शरीर के अंगों का उपयोग कर लंबाई मापना बहुत रोचक होगा। आओ, हम भी शरीर के अंगों का उपयोग कर कुछ मापते हैं।”
“हमें क्या मापना चाहिए? अच्छा, आओ हम अपने कक्षा-कक्ष में रखे मेज की लंबाई मापते हैं”, तस्नीम कहती है।

पद्मा बात आगे बढ़ाते हुए कहती है, “और इसको मापने के लिए हम शरीर के किस अंग का उपयोग करेंगे?”
दीपा कहती है, “हम हाथ के पंजे की चौड़ाई का उपयोग करते हैं। मैं दिखाती हूँ कि यह कैसे किया जाता है। मैंने अपनी माँ को इसका उपयोग करते हुए देखा है। वह इसे बालिश्त (हैंडस्पैन) कहती हैं।”
हरदीप ने कहा “अच्छा। आओ, हम अपने माप को अंकित भी करते हैं।”

पद्मा कहती है, “अरे, मेज की लंबाई के माप में हम सभी के बालिश्तों की संख्या तो भिन्न-भिन्न प्राप्त हुई है। तब हम बालिश्तों में मेज की लंबाई के बारे में क्या कह सकते हैं?”
“परंतु ये संख्याएँ भिन्न क्यों होनी चाहिए?” हरदीप विचारपूर्वक पूछता है।
तस्नीम कहती है, “मुझे लगता है कि इसका कारण हमारे बालिश्तों की माप अलग-अलग होना है।”
अनीश ने सुझाया, “आओ, इसकी जाँच करते हैं।”
अब, उन पाँचों ने अपने-अपने बालिश्त एक-दूसरे के साथ रखे और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि उनके बालिश्तों की लंबाई भिन्न-भिन्न है।
दीपा विचारपूर्वक कहती है, “संभवत: यही कारण है कि लोग किसी वस्तु की लंबाई मापने के लिए पैमाने या मापन-फीते का उपयोग करते हैं।”
जब दीपा और उसके साथी अपने-अपने बालिश्त की लंबाई से मेज की लंबाई की तुलना करते हैं तब मेज की लंबाई को बालिश्तों की संख्या के रूप में व्यक्त करते हैं। यहाँ मापन के लिए उपयोग में लाया गया बालिश्त एक मात्रक (यूनिट) का उदाहरण है। अतः लंबाई दो भागों में व्यक्त की जाती है- संख्या और मात्रक। उदाहरण के लिए, यदि मेज की लंबाई 13 बालिश्त के समान है तो ’13’ संख्या है और ‘बालिश्त’ मापन के लिए चुना गया मात्रक है।
तथापि, बालिश्त और उसके समान अन्य मात्रक जैसे– हाथ, पैर, मुट्ठी या अँगुली की लंबाई भिन्न-भिन्न व्यक्तियों की भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। अत: एक ऐसे मात्रक की आवश्यकता है जिससे अलग-अलग लोगों द्वारा लिया गया एक ही लंबाई का माप एक समान हो।
प्राचीन काल से ही भारत में मापन प्रणालियों का एक समृद्ध इतिहास रहा है। प्राचीन भारतीय साहित्य में कुछ मात्रकों का वर्णन है जैसे– अँगुल (अँगुली की चौड़ाई), बहु-अँगुल, धनुष, योजन आदि। उनका उपयोग कलाकृतियों, वास्तुकला और नगर नियोजन में होता था। बढ़ई और दर्जी जैसे पारंपरिक शिल्पकार आज भी अँगुल का उपयोग करते हैं। सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) सभ्यता के उत्खनन स्थलों से प्राप्त अनेक वस्तुओं में रेखांकित चिह्न पाए गए हैं जो पैमाने हो सकते हैं।

मानक मात्रक Class 6 Notes
संसार के विभिन्न भागों में समय के साथ विभिन्न मात्रक प्रणालियाँ विकसित हुईं। तथापि, जब लोगों ने एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करना आरंभ किया तब इससे बहुत भ्रम उत्पन्न हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि संसार के विभिन्न देश एक साथ आए तथा मापन के मानक-मात्रकों के विषय में एकमत होने लगे और उन्हें अपनाने लगे। आजकल उपयोग में लाई जाने वाली मात्रक प्रणाली को ‘अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली’ अथवा SI (इंटरनेशनल सिस्टम ऑफ यूनिट्स का संक्षेपाक्षर) मात्रकों के रूप में जाना जाता है।

लंबाई का SI मात्रक मीटर है। इसका प्रतीक m है। चित्र में एक मीटर पैमाना दर्शाया गया है। एक मीटर (m) को 100 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक भाग को एक सेंटीमीटर (cm) कहते है। संभवत: आप मीटर पैमाने के एक छोटे से भाग से परिचित हैं जो आमतौर पर 15 cm लंबा होता है उसे चित्र 5.3 में दिखाया गया है।
15 cm पैमाने को ध्यान से देखिए। इसमें (cm में) 0 से 15 तक अंकन हैं। दो बड़े चिह्नों के बीच के भाग की लंबाई 1 cm है। जैसे– 1 से 2 के बीच अथवा 5 से 6 के बीच। ध्यान दीजिए कि इस 1 cm लंबाई के भाग को फिर 10 बराबर भागों में विभाजित किया गया है। इन छोटे भागों में प्रत्येक की लंबाई को मिलीमीटर (mm) कहते हैं। 1 mm, लंबाई का वह सबसे छोटा मान है जिसे आप इस पैमाने का उपयोग कर माप सकते हैं। 1 mm एक cm के दसवें भाग (1 mm = 0.1 cm) के बराबर है।

बड़ी लंबाई मापने के लिए हम बड़े मात्रक किलोमीटर (km) का उपयोग करते हैं, जो 1000 मीटर के बराबर होता है और छोटी लंबाई मापने के लिए हम छोटे मात्रक का उपयोग करते हैं, जैसे– सेंटीमीटर या मिलीमीटर।
1 km = 1000 m
1 m = 100 cm
1 cm = 10 mm

आपने कुछ पैमानों में एक अन्य प्रकार का अंकन भी देखा होगा। इन पैमानों में यह अंकन इंच (inch) में है, जहाँ 1 inch = 2.54 cm होता है। पहले के दिनों में, लंबाई मापने के लिए इंच (inch), फुट (foot) जैसे मात्रकों का उपयोग होता था। इनका उपयोग अभी कुछ लोग करते हैं।


लंबाई मापने की सही विधि Class 6 Notes
किसी वस्तु की लंबाई मापने के लिए हमें एक उपयुक्त पैमाने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, यदि आपको अपनी पेंसिल की लंबाई मापनी है तो आप 15 cm पैमाने का उपयोग कर सकते हैं। इसी प्रकार किसी कक्ष की ऊँचाई मापने के लिए मीटर पैमाना या मापन- फीते की आवश्यकता पड़ सकती है। किसी वृक्ष के तने की मोटाई अथवा अपनी छाती के आकार के माप के लिए आप सीधे तौर पर मीटर पैमाने का उपयोग नहीं कर सकते। ऐसे मापों के लिए दर्जी के फीते जैसा लचीला मापन-फीता अधिक उपयुक्त होता है। लंबाई का मापन करते समय, हमें कुछ सावधानियाँ बरतने की आवश्यकता होती है।
पैमाने को रखने की सही विधि क्या है?
पैमाने को वस्तु के संपर्क में इसकी लंबाई के अनुदिश (साथ-साथ) रखिए जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

पैमाने को पढ़ते समय आँख की सही स्थिति क्या है?
उदाहरण के लिए, यदि आप एक पेंसिल को पैमाने के साथ संरेखित कर उसका माप लेने का प्रयास कर रहे हैं, तो आपकी आँख की स्थिति पेंसिल की नोंक (चित्र) के ठीक ऊपर होनी चाहिए।

यदि पैमाने के सिरे टूटे हों तो लंबाई का मापन कैसे करें?
यदि किसी पैमाने के सिरे टूटे हैं या शून्यांक स्पष्ट नहीं है तब भी इसका उपयोग मापन के लिए किया जा सकता है। ऐसे पैमाने के लिए किसी अन्य पूर्णांक, जैसे– 1.0 cm (चित्र 5.6) का उपयोग कर सकते हैं। इसके उपरांत आपको दूसरे सिरे के पाठ्यांक से इस पूर्णांक के पाठ्यांक को घटाना चाहिए उदाहरण के लिए– चित्र में एक सिरे का पाठ्यांक 1.0 cm तथा दूसरे सिरे का पाठ्यांक 10.4 cm है। अतः वस्तु की लंबाई 10.4 cm – 1.0 cm = 9.4 cm है।

दृष्टिबाधित विद्यार्थी लंबाई का मापन कैसे करते हैं? वे उभरे अंकन बिंदु वाले पैमाने का उपयोग करते हैं जिन्हें स्पर्श से महसूस किया जा सकता है।

क्रियाकलाप 5.1 – आइए, मापन करें
लंबाई मापने के लिए अपने आस-पास की कुछ वस्तुएँ लीजिए। जैसे– कंघा, पेन, पेंसिल और एक रबड़ (इरेजर)।
मीटर पैमाने से उनकी लंबाई का एक-एक करके मापन कीजिए और उसे तालिका 2 में लिखिए।

लंबाई लिखते समय मात्रक लिखना न भूलें। अतः आपके परिणाम के दो भाग होंगे– एक भाग अंक एवं दूसरा भाग मापन का मात्रक।

आपकी कक्षा में आपके कुछ मित्रों ने भी उन्हीं वस्तुओं की लंबाई मापी होगी जिनका मापन आपने किया है। आपके द्वारा मापी गई किसी वस्तु की लंबाई की तुलना अपने मित्रों द्वारा मापी गई उसी वस्तु की लंबाई से करें। क्या मापी गई लंबाई समान है या थोड़ी भिन्न है? यदि समान नहीं है तो भिन्न होने के संभावित कारणों पर चर्चा करें।

मात्रकों के प्रतीक हिंदी में भी वही रहते हैं जो हम अंग्रेजी में लिखते हैं। अत: किलोमीटर का संकेत km, मीटर का m, सेंटीमीटर का cm एवं मिलीमीटर का संकेत mm लिखा जाएगा। ध्यान दें कि इन संकेतों का पहला अक्षर भी अंग्रेजी वर्णमाला का छोटा अक्षर ही है, जब तक कि ये वाक्य के आरंभ में न आ रहे हों। मात्रकों और उनके संकेतों के बहुवचन नहीं होते हैं। इसलिए, इनके अंत में ‘s’ नहीं लगता है। मात्रक के संकेत के अंत में बिंदु ‘का चिह्न भी नहीं लगाया जाता। लंबाई का मान लिखते समय संख्या और मात्रक के बीच मैं स्थान छोड़ना होता है।

किसी वक्र रेखा की लंबाई मापना Class 6 Notes
अनीश और उसके माता-पिता ने घर में उत्सव के अवसर पर सजावट के लिए विद्युत बल्बों की लड़ी लगाई जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। उन्होंने लड़ी की आवश्यक लंबाई का मापन कैसे किया होगा?

वक्र रेखा की स्थिति में, लचीले मापन फीते या धागे का उपयोग कर मापन किया जा सकता है जैसे कि चित्र में प्रदर्शित किया गया है।

इसके बाद धागे को सीधा किया जा सकता है और मीटर पैमाने का उपयोग कर उसकी लंबाई को मापा जा सकता है।
स्थिति का निर्धारण Class 6 Notes
एक दिन शिक्षिका ने अपने विद्यार्थियों को सूचित किया कि उन्होंने दो दिन पश्चात् पास के एक उद्यान में शैक्षिक भ्रमण की योजना बनाई है। शिक्षिका विद्यार्थियों से प्रात: काल सीधे वहाँ पहुँचने के लिए कहती हैं। दीपा और उसके मित्र चर्चा करने लगते हैं कि उद्यान उनके विद्यालय की तुलना में पास होगा या दूर होगा। तस्नीम और पद्मा कहती हैं कि उद्यान पास में होगा, दीपा और अनीश को लगता है कि विद्यालय पास में होगा, हरदीप सोचता है कि दोनों लगभग बराबर दूरी पर हैं (चित्र)।

आप क्या सोचते हैं कि कौन सही है? सभी सही हैं (चित्र)। तब, उनका प्रेक्षण भिन्न-भिन्न क्यों है? क्योंकि वे विद्यालय और उद्यान की दूरी का अनुमान अपने-अपने घरों से कर रहे हैं।
इसके विपरीत यदि उन्होंने एक ही वस्तु या स्थान (जैसे कि बस स्टैंड) से दूरी के बारे सोचा होता तो उनका प्रेक्षण समान होता।
किसी वस्तु की दूरी का निर्धारण किसी नियत वस्तु या बिंदु के सापेक्ष किया जाता है और इस बिंदु को संदर्भ बिंदु कहते हैं।
कुछ दिन पश्चात् हरदीप उत्साहपूर्वक अपने मित्रों से कहता है- “आओ, हम सभी खेल के मैदान में चलते हैं। खेल शिक्षिका चाहती हैं कि हम खेल दिवस के लिए चूना पाउडर से रेखाएँ खींचकर कबड्डी कोर्ट बनाने में उनकी सहायता करें।”
पद्मा– “हमें अधिक लंबाई के मापन-फीते की आवश्यकता होगी। इसे खेल के कक्ष से लेते हैं।” (चित्र)

दीपा– “आओ, सबसे पहले मैदान में हम एक ऐसा बिंदु निश्चित कर लें जहाँ से हम रेखाएँ खींचने के लिए दूरी मापेंगे। इस बिंदु को हम अपना संदर्भ बिंदु कहते हैं” (चित्र)।

कुछ दिन पश्चात् पद्मा बस से अपने नानी-नाना जी से मिलने के लिए दिल्ली जा रही थी। वह दिल्ली पहुँचने के लिए उत्सुक थी और सड़क के किनारे लगे किलोमीटर सूचक पत्थरों को पढ़ रही थी। एक किलोमीटर सूचक पत्थर पर ‘दिल्ली 70 km’ लिखा था (चित्र)।

इसके पश्चात् अगले किलोमीटर सूचक पत्थर पर ‘दिल्ली 60 km’ लिखा था। प्रत्येक क्रमागत किलोमीटर सूचक पत्थर यह इंगित कर रहा था कि वह अपने नानी-नाना जी के घर के निकट पहुँच रही थी। ये किलोमीटर सूचक पत्थर दिल्ली से उसकी दूरी को इंगित कर रहे थे। अतः इस परिस्थिति में दिल्ली संदर्भ बिंदु है।

यदि किलोमीटर सूचक पत्थर ‘दिल्ली 70 km’ दर्शाता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है तो हम कह सकते हैं कि पद्मा की स्थिति दिल्ली से 70 km दूरी पर है। जब किलोमीटर सूचक पत्थर पर ‘दिल्ली 60 km’ लिखा होता है तो पद्मा की स्थिति दिल्ली से 60 km दूरी पर है।

क्या इसका तात्पर्य है कि संदर्भ बिंदु के सापेक्ष पद्मा की स्थिति समय के साथ परिवर्तित हो रही है? किसी वस्तु की स्थिति एक संदर्भ बिंदु के सापेक्ष कब परिवर्तित होती है? क्या यह तब परिवर्तित होती है जब वस्तु गतिशील होती है?
गतिशील वस्तुएँ Class 6 Notes
क्रियाकलाप 5.2 – आइए, खोज करें
अपने आस-पास की वस्तुएँ देखिए और पाँच गतिशील वस्तुओं तथा पाँच ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए जो स्थिर (विराम अवस्था में) हैं।
अपने प्रेक्षण को तालिका 3 में लिखिए।

विचार कीजिए कि आपने यह कैसे सुनिश्चित किया कि कोई वस्तु गतिशील है अथवा स्थिर है? तालिका 3 में अपने निर्णय का औचित्य लिखिए।
अपने औचित्यों की तुलना एवं विश्लेषण कीजिए। कोई कैसे निर्णय ले सकता है कि कोई वस्तु गतिशील है या स्थिर है?
कोई वस्तु गति में तब कही जा सकती है जब किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष उसकी स्थिति समय के साथ परिवर्तित होती है। यदि किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन नहीं होता है तो वह वस्तु स्थिर है।
दीपा ने बस में अपने चारों ओर देखा फिर ध्यान दिया कि सभी यात्री बैठे हुए हैं। उसने एक मिनट बाद फिर अपने चारों ओर देखा और पाया कि वे अब भी अपनी सीट पर बैठे हुए हैं। वह आश्चर्यचकित हुई ‘क्या ये गतिशील हैं?” उसने निष्कर्ष निकाला कि यात्रियों की स्थिति समय के साथ परिवर्तित नहीं हो रही है। अतः निश्चित ही ये स्थिर हैं। तथापि जब उसने बाहर देखा तो उसने पाया कि वे गतिशील हैं क्योंकि बाहर की वस्तुओं के सापेक्ष उनकी स्थिति बदल रही है।

संदर्भ बिंदु यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि एक वस्तु स्थिर है या गति में हैं। यदि दीपा स्वयं (या बस) को संदर्भ बिंदु मानती है तो यात्री स्थिर हैं। तथापि, यदि वह बस से बाहर की किसी वस्तु (जैसे– एक भवन) को संदर्भ बिंदु मानती तो यात्री (और वह बस) गति में हैं।
मान लीजिए कि आप ऐसे पानी के जहाज में यात्रा कर रहे हैं जो शांत समुद्र पर नियत चाल से सरल रेखा में चल रहा है। यह भी मान लीजिए कि जहाज में कोई खिड़की नहीं है। क्या कोई ऐसी विधि है जिससे आप यह सुनिश्चित कर सकें कि जहाज गति में है या विराम अवस्था में है?

गति के प्रकार Class 6 Notes
क्रियाकलाप 5.3– आइए, खोज करें
एक रबड़ लीजिए और निश्चित ऊँचाई से उसे छोड़िए। उसकी गति का अवलोकन कीजिए।
क्या रबड़ एक सरल रेखा के अनुदिश गति करती है? जब एक संतरा पेड़ से गिरता है तो क्या वह सरल रेखा में गति करता है? क्या आपने गणतंत्र दिवस परेड देखी है? परेड के समय विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मार्च पास्ट का स्मरण कीजिए। क्या वे एक सरल रेखा में चलते हैं? जब एक भारी बॉक्स धकेला जाता है तो वह भी सीधी रेखा के अनुदिश (चित्र) गति कर सकता है।

जब कोई वस्तु सरल रेखा के अनुदिश गति करती है तो उसकी गति को सरल रेखीय गति कहते हैं। अपने चारों ओर के परिवेश से इसी प्रकार की गति की पहचान कीजिए।

परंतु क्या वस्तुएँ हमेशा सरल रेखा के अनुदिश ही गति करती हैं? आपने झूलों और घूमने वाले हिंडोलों पर झूलने का आनंद लिया होगा। क्या गति के ये प्रकार भी सरल रेखीय गति हैं?
क्रियाकलाप 5.4– आइए, जाँच करें
एक धागे के एक छोर पर एक रबड़ या एक आलू बाँधिए। इसके दूसरे छोर को हाथ से पकड़िए तथा इसे चित्र की तरह घुमाइए। इसकी गति का अवलोकन कीजिए।
क्या रबड़ की गति घूमने वाले हिंडोले की गति के समान है? जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ के अनुदिश गति करती है तब उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती है।

क्रियाकलाप 5.5 – आइए, जाँच करें
एक धागे के एक छोर पर एक रबड़ या एक आलू बाँधिए। धागे का दूसरा छोर पकड़कर रबड़ को (चित्र) लटकाइए। अपना हाथ स्थिर रखिए।
दूसरे हाथ का उपयोग करते हुए धीरे से रबड़ को एक ओर ले जाइए और फिर छोड़ दीजिए (चित्र)। क्या यह एक माध्य स्थिति के इधर-उधर गति करता है? क्या इसकी गति झूले की गति के समान हैं?

जब कोई वस्तु किसी नियत स्थिति के इधर-उधर गति करती है तब उसकी गति दोलन-गति कहलाती है।
क्रिया कलाप 5.6 – आइए, जाँच करें
लगभग 50 cm लंबी धातु की एक पतली पट्टी लीजिए। इसका एक छोर मेज पर दबा दीजिए। आप इसे दबाने के लिए कुछ पुस्तकों या एक ईंट का उपयोग (चित्र) कर सकते हैं।

पट्टी (स्ट्रिप) के दूसरे छोर को थोड़ा दबाइए और फिर छोड़िए। पट्टी के इस छोर की गति का अवलोकन कीजिए। क्या ये ऊपर-नीचे गति करती है? यह भी दोलन-गति का उदाहरण है।
यदि कोई वस्तु एक निश्चित समय अंतराल के बाद अपनी गति दोहराती है तो उसकी गति आवर्ती गति कहलाती है। जब कोई वस्तु वृत्तीय गति में होती है तब वह बार-बार वृत्तीय पथ के अनुदिश गति करती है। दोलन-गति करती हुई वस्तु भी इधर-उधर गति करते हुए अपनी गति को दोहराती है। वृत्तीय गति एवं दोलन-गति दोनों ही प्रकृति में आवर्ती गति हैं।

क्रियाकलाप 5.7 – आइए, पहचानें
चित्र में दर्शाए गए बच्चों का पार्क देखिए अथवा किसी बच्चों के पार्क का भ्रमण कीजिए। विभिन्न प्रकार की गति पर ध्यान दीजिए। उनका सरल रेखीय, वृत्तीय एवं दोलन-गति में वर्गीकरण कीजिए।

तालिका 4 में सभी गति सूचीबद्ध कीजिए। आपने किसी गति को किसी विशेष वर्ग में क्यों रखा? इसका औचित्य बताइए।

Class 6th Science Notes
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