Teachers often provide Class 5 Hindi Notes Veena Chapter 8 काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा Summary in Hindi Explanation to simplify complex chapters.
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा Class 5 Summary in Hindi
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा Class 5 Hindi Summary
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा का सारांश
इस पाठ में लेखक ने अपने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के अनुभव को पत्र के रूप में लिखा है। काजीरंगा उद्यान असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है। यहाँ विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी हैं। इनमें एक सींग वाले गैंडे भी थे, जिनके कारण काजीरंगा विश्व भर में प्रसिद्ध है।
यह हाथी के बाद भारत का सबसे बड़ा पशु है। इसे इंडियन राइनो भी कहते हैं। यह मुख्यतः भारत और नेपाल के जंगलों में पाया जाता है। इसके शरीर पर उपस्थित मोटी तह कवच की तरह लगती है। कई लोग ऐसा मानते थे कि राइनो के सींग में औषधीय गुण हैं।

इस कारण इनका शिकार इतनी अधिक संख्या में हुआ कि इनका अस्तित्व ही खतरे में आ गया। हालाँकि वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया कि सींग में औषधीय गुण नहीं है। सुबह की यात्रा में हिरणों के अनेक झुंड दिखाई दिए। अगले दिन वे जीप में बैठकर फिर यात्रा के लिए निकल पड़े। वहीं झील के किनारे सैकड़ों पक्षियों पेलिकन, सारस, बगुला, कलहोन आदि के झुंड दिखाई पड़े।
लौटते समय जंगली हाथियों का एक झुंड भी उन्हें नज़र आया। लेकिन एक भी रॉयल बंगाल टाइगर दिखाई नहीं दिया क्योंकि वे रात में ही निकलते हैं। इन वन्य साथियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, जैसे कि मिलजुलकर शांतिपूर्वक रहना ।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा Class 5 Summary in Hindi
- “काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा” पाठ से हमें कई महत्त्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं। इस यात्रा के माध्यम से हम निम्नलिखित अधिगम निष्कर्ष निकाल सकते हैं-
- जैव विविधता का महत्त्व- काजीरंगा अपनी अनूठी जैव विविधता, विशेषकर एक सींग वाले गैंडे के लिए जाना जाता है। यह पाठ हमें विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों, पक्षियों और वनस्पतियों के संरक्षण के महत्व को समझाता है। यह दर्शाता है कि कैसे एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र हमारे ग्रह के लिए आवश्यक है।
- संरक्षण के प्रयास-पाठ हमें यह भी बताता है कि कैसे काजीरंगा में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। इसमें अवैध शिकार को रोकने के प्रयास, पर्यावास का रखरखाव और वन्यजीवों की निगरानी शामिल है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास कितने महत्त्वपूर्ण हैं।
- प्राकृतिक सौंदर्य और शांति-यह पाठ हमें प्रकृति की गोद में शांति और सुकून महसूस करने का महत्त्व सिखाता है, जो आज के भाग-दौड़ भरे जीवन में अक्सर खो जाता है।
- पर्यटन का प्रभाव – यह पाठ अप्रत्यक्ष रूप से हमें पर्यावरण-पर्यटन के महत्त्व और उसके प्रभावों पर भी सोचने को प्रेरित करता है।
- मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व-यह यात्रा हमें मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व के महत्त्व पर विचार करने का अवसर देती है। यह हमें सिखाती है कि हमें वन्यजीवों के आवास का सम्मान करना चाहिए और उनके साथ शांतिपूर्ण ढंग से रहना सीखना चाहिए।
“काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा” पाठ असम में स्थित प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के महत्त्व और उसकी विशेषताओं का वर्णन करता है। यह पाठ मुख्य रूप से इस उद्यान में पाए जाने वाले एक सींग वाले गैंडों पर केंद्रित है, जिनके लिए उद्यान विश्व-भर में प्रसिद्ध है। इन्हें इंडियन राइनो ( भारतीय गैंडा) भी कहते हैं।
पाठ बताता है कि काजीरंगा उद्यान जैव विविधता का एक अनूठा उदाहरण है, जहाँ गैंडों के अलावा विभिन्न प्रकार के वन्यजीव जैसे हाथी, बाघ, हिरण और विचित्र पक्षियों की प्रजातियाँ निवास करती हैं। यह उद्यान प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों के लिए जाना जाता है। यहाँ चार प्रकार के हिरन पाए जाते हैं-
- भौंकने वाले हिरण,
- बौने सूअर हिरण,
- दलदली हिरण और
- सॉभर हिरण ।
इस यात्रा के माध्यम से, पाठकों को काजीरंगा के हरे-भरे घास के मैदानों, दलदली भूमि और छोटी नदियों से परिचित कराया जाता है, जो इसे इन जानवरों के लिए एक आदर्श आवास बनाते हैं। पाठ में वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है।
कुल मिलाकर, यह पाठ काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक सुंदरता, उसकी अनूठी वन्यजीव संपदा, विशेषकर एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण में उसके महत्त्व और एक पर्यटक स्थल के रूप में उसकी अपील का एक संक्षिप्त परिचय देता है। यह वन्यजीवों और प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है।
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि- मनुष्य को वन्यजीवों के संरक्षण, उनके अवैध शिकार को रोकने और शांतिपूर्ण ढंग से रहने की प्रेरणा देती है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा शब्दार्थ –
उद्यान – बाग-बगीचा,
महावत – हाथी की देखभाल आदि करने वाला,
कवच – बाहरी आवरण जो किसी से रक्षा करता है, रणक्षेत्र-जिस स्थान पर युद्ध हो,
हिसंक – हिंसा करने वाला,
निगरानी – देखभाल,
अद्भुत – निराला ।
Class 5 Hindi Chapter 8 Summary काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा
प्रिय बच्चो,
यह पत्र मैं तुम्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लिख रहा हूँ।
काजीरंगा उद्यान असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है। यहाँ विभिन्न प्रकार के पशु व पक्षी हैं। आज सुबह ही हम हाथियों पर चढ़कर उद्यान देखने गए। इसके लिए हमें बहुत सवेरे उठना पड़ा तब सूरज भी नहीं निकला था।
उद्यान में सैकड़ों पशु थे। हिरण और जंगली भैंसों के कई झुंड आराम से घास चर रहे थे। उनमें कुछ एक सींग वाले गैंडे भी थे। इसी पशु के कारण काजीरंगा पूरे संसार में प्रसिद्ध हो गया है।
हिरणों और भैंसों ने हमें संदेह की दृष्टि से देखा और अलग हट गए। पर गैंडे वहीं जमे रहे। हमने एक सींग वाला गैंडा पहली बार देखा। यह हाथी के बाद भारत का सबसे बड़ा पशु है । इसको इंडियन राइनो (भारतीय गैंडा) भी कहते हैं। यह केवल भारत और नेपाल के जंगलों में पाया जाता है।
इंडियन राइनो (भारतीय गैंडे) के शरीर पर मोटी तह होती है, जैसे वह कवच पहने हो। इस पर हमारे महावत ने एक रुचिकर कथा सुनाई।

भगवान कृष्ण ने एक बार सोचा कि हाथी के बदले गैंडे को रणक्षेत्र में भेजा जाए। उन्होंने उसे कवच पहनाकर अभ्यास कराया। पर गैंडा निर्देशों का पालन न कर सका। बस भगवान कृष्ण ने कवच सहित ही उसे वापस वन में भेज दिया।
सैकड़ों वर्ष पहले इंडियन राइनो (भारतीय गैंडे) पश्चिम में पेशावर से लेकर पूर्व में असम तक पाए जाते थे। पर लोगों ने राइनो के सींग पाने के लिए उनका शिकार किया। लोग यह मानते थे कि सींग में औषधि-संबंधी गुण हैं।
बाद में वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि सींग में ऐसा कुछ नहीं है। इंडियन राइनो (भारतीय गैंडों) का शिकार इतनी अधिक संख्या में हुआ है कि अब उनकी संख्या कम हो गई है। इनमें आधे से अधिक काजीरंगा में रहते हैं। इसीलिए पूरे संसार से पशु-प्रेमी इसे देखने काजीरंगा आते हैं।
हमारा हाथी आगे बढ़ा तो एक मादा राइनो (गैंडा) अपने बच्चे के साथ दिखाई दी। महावत हमें पास नहीं ले गए। उन्होंने कहा कि शिशु साथ में हो तो मादा राइनो (गैंडा) हिंसक हो जाती है। हाथी के पास आने पर वह हमला कर सकती है।
सुबह की यात्रा में हमने हिरणों के अनेक झुंड देखे। काजीरंगा में चार प्रकार के हिरण हैं – भौंकने वाले हिरण, बौने सूअर हिरण, दलदली हिरण और साँभर हिरण। हमें वहाँ जंगली सूअर भी दिखाई दिए।
हमारी यात्रा शीघ्र समाप्त हो गई। मेरा मन अभी भरा नहीं था। अगले दिन सुबह का नाश्ता करके हम फिर निकल पड़े। इस बार हम जीप में गए। साथ में वन संरक्षक भी था।

ड्राइवर हमें एक बील यानी झील की ओर ले गया। बील पर सैकड़ों पक्षियों के झुंड थे – पेलिकन (एक जल पक्षी), सारस, बगुला और कलहोन इत्यादि। एक ही स्थान पर इतने सारे पक्षी मैंने कभी नहीं देखे थे। बील के पानी में कुछ ऊदबिलाव भी उछल-कूद कर रहे थे।
लौटते समय तो हमारे भाग्य ही खुल गए। सामने जंगली हाथियों का एक झुंड दिखा। हमें बहुत प्रसन्नता हुई। झुंड में पाँच-छह बच्चे थे। जब तक पूरे झुंड ने रास्ता पार नहीं कर लिया, तब तक एक विशाल हाथी खड़ा निगरानी करता रहा।
काजीरंगा में मांसाहारी रॉयल बंगाल टाइगर भी हैं पर हमें दिखे नहीं। गाइड ने बताया कि उन्हें देखना कठिन है क्योंकि वे रात में ही निकलते हैं। कुल मिलाकर यह एक अद्भुत अनुभव रहा। काजीरंगा में अलग-अलग प्रजाति के पशु शांति और भाईचारे से संग-संग रहते हैं। मेरे मन में यह बात बार-बार उठ रही थी कि क्यों नहीं मानव भी इनकी तरह ही शांतिपूर्वक मिल-जुलकर रहता ! हम अपने वन्य-साथियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। है न!
तुम्हारे चाचा
अरूप
-अरूप कुमार दत्ता
(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)
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