Teachers often provide Class 5 Hindi Notes Veena Chapter 6 चतुर चित्रकार Summary in Hindi Explanation to simplify complex chapters.
चतुर चित्रकार कविता Class 5 Summary in Hindi
चतुर चित्रकार Class 5 Hindi Summary
चतुर चित्रकार कविता का सारांश
इस कविता में एक साहसी तथा चतुर चित्रकार के बारे में बताया गया है, जो एक सुनसान जगह पर नदी, पेड़-पौधों के चित्र बना रहा था। तभी वहाँ एक शेर आ गया, जिसे देखकर सर्वप्रथम तो वह उससे डर गया । मगर तभी उसने बुद्धि से चतुराई भरा निर्णय लिया। उसने शेर से कहा कि बैठो, मैं तुम्हारा चित्र बना देता हूँ। शेर के बैठ जाने पर उसने उसका सामने से चित्र बनाया। फिर उसके पीछे का चित्र बनाने के लिए उसे घूमकर बैठने के लिए कहा। शेर के मुँह दूसरी तरफ़ करने पर वह चुपके से झील किनारे स्थित नाव पर बैठकर वहाँ से निकलने लगा।

इस तरफ़ का चित्र बनने में शेर को पिछली बार से कुल ज़्यादा ही समय लगने का आभास हुआ तो वह घूमा । उसने देखा कि चित्रकार नाव से भाग रहा है। इस पर उसने झुंझलाकर गुस्से में कहा कि डरपोक चित्रकार अपना कागज़ – कलम तो लेता जा । इस पर चित्रकार ने कहा कि इन्हें चित्रकला का अभ्यास करने के लिए अपने ही पास रखो ।
चतुर चित्रकार Class 5 Summary in Hindi
- सस्वर वाचन के साथ बच्चे कविता वाचन सीखेंगे।
- शुद्ध और लयबद्ध वाचन कौशल का विकास होगा।
- उत्साह और हास्य सहित भावों को अभिव्यक्त करेंगे।
- रचनात्मक और अभिव्यक्ति कौशल विकसित होगा।
- अपनी कल्पना और विचारों को मिलाकर नई कविता लिखना सीखेंगे।
- कविता के माध्यम से बच्चे उचित निर्णय लेने की क्षमता को समझ पाएँगे।
- चित्रकारी के प्रति रुझान उत्पन्न होगा।
कविता में प्रकृति प्रेमी चित्रकार की चतुराई और सूझ-बूझ को दर्शाया गया है। चित्रकार सुनसान जगह पर चित्र बना रहा था। वह अचानक वहाँ शेर को देखकर डर जाता है लेकिन फिर हिम्मत करते हुए शेर को चित्र बनाने के लिए मनाता है। कुछ क्षण बाद चित्रकार शेर को पीठ फिराकर बैठने के लिए कहता है और अवसर देखकर उस स्थान से भागकर अपनी जान बचाता है। चित्रकार कलम और कागज़ को वहीं छोड़कर नाव पर सवार होता है और अपनी रक्षा करता है।
संदेशः विपत्ति के समय बुद्धिमानी और धैर्य से काम लेना चाहिए।
इस कविता के भाव को समझकर हमें यह शिक्षा मिलती है कि- हमें संकट की घड़ी में बड़े ही संयम और चतुराई से काम करना चाहिए।
चतुर चित्रकार कविता हिंदी भावार्थ Pdf Class 5
चतुर चित्रकार सप्रसंग व्याख्या
1. चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र,
इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र।
उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश,
नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।
फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप,
बोला- सुंदर चित्र बना दूँ, बैठ जाइए आप।
शब्दार्थ –
चित्रकार – चित्र बनाने वाला,
सुनसान – वीरान, यम राजा-यमों का स्वामी, धर्मराज यमराज ।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा – 5’ में संकलित कविता ‘चतुर चित्रकार’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में चित्रकार के डर तथा उस पर काबू पाने की स्थिति को दर्शाया गया है।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में बताया गया है कि एक चित्रकार सुनसान जगह पर पहाड़, नदी तथा पेड़-पौधों के चित्र बना रहा था। तभी वहाँ एक शेर के आ जाने से वह डर जाता है, लेकिन तुरंत वह खुद को सँभाल लेता है तथा शेर को चित्र बनवाने के लिए बैठने को कहता है।

2. उकडू – मुकड़ू बैठ गया वह, सारे अंग बटोर,
बड़े ध्यान से लगा देखने, चित्रकार की ओर।
चित्रकार ने कहा–हो गया, आगे का तैयार,
अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।
बैठ गया पीठ फिराकर, चित्रकार की ओर,
चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर ।
शब्दार्थ –
उकडू – मुकड़ू – घुटने मोड़कर बैठने का एक ढंग।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा-5’ में संकलित कविता ‘चतुर चित्रकार’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में शेर से बचने की चित्रकार की युक्ति को दिखाया गया है।
व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में बताया गया है कि शेर उकडू-मुकडू बैठकर चित्रकार को बड़े ध्यान से देख रहा है तथा चित्रकार उसका चित्र बना रहा था। तभी चित्रकार शेर से बचने के लिए उसे मुँह दूसरी तरफ़ करके बैठने के लिए कहता है ताकि उसके पिछले भाग का चित्र बनाया जा सके। शेर के चित्रकार की तरफ़ पीठ करते ही चित्रकार वहाँ से चोर की तरह भाग जाता है।
3. बहुत देर तक आँख मूँदकर, पीठ घुमाकर शेर,
बैठे-बैठे लगा सोचने, इधर हुई क्यों देर?
झील किनारे नाव थी, एक रखा था बाँस,
चित्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के साँस।
जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर,
इधर शेर था धोखा खाकर, झुंझलाहट में चूर ।
शब्दार्थ –
झुंझलाहट – चिढ़ना ।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा – 5’ में संकलित कविता ‘चतुर चित्रकार’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में चित्रकार की चतुराई तथा शेर की झुंझलाहट को दर्शाया गया है।
व्याख्या- प्रस्तुत पंक्तियों में बताया गया है कि शेर अपने पीछे के भाग का चित्र बनवाने के लिए चित्रकार की ओर पीठ करके बैठा है। पीछे का चित्र बनने में ज़्यादा समय लगने पर वह वापस घूमता है तो देखता है कि चित्रकार उसकी पकड़ से काफ़ी दूर निकल चुका है। इस पर वह झुंझला जाता है।
4. शेर बहुत खिसियाकर बोला, नाव जरा ले रोक,
कलम और कागज़ तो ले जा रे कायर डरपोक ।
चित्रकार ने कहा तुरंत ही रखिए अपने पास,
चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास ।
शब्दार्थ –
ज़रा – थोड़ा,
खिसियाना – गुस्सा करना ।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा – 5’ में संकलित कविता ‘चतुर चित्रकार’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में शेर के गुस्से तथा चित्रकार की हाज़िर – जवाबी को दिखाया गया है।
व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में शेर गुस्से में भरकर चित्रकार से नाव रोकने के लिए कहता है ताकि वह उसे कलम – कागज़ दे सके। मगर चित्रकार ने उसे कहा कि आप इसे जंगल में चित्रकला का अभ्यास करने के लिए रख लीजिए ।
Class 5 Hindi Chapter 6 Summary चतुर चित्रकार
चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र,
इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र ।
उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश,
नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।
फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप,
बोला – सुंदर चित्र बना दूँ, बैठ जाइए आप

उकडू-मुकडू बैठ गया वह, सारे अंग बटोर,
बड़े ध्यान से लगा देखने, चित्रकार की ओर।
चित्रकार ने कहा – हो गया, आगे का तैयार,
अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।
बैठ गया पीठ फिराकर, चित्रकार की ओर,
चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर ।

बहुत देर तक आँख मूँदकर, पीठ घुमाकर शेर,
बैठे-बैठे लगा सोचने, इधर हुई क्यों देर ?
झील किनारे नाव थी, एक रखा था बाँस,
चित्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के साँस ।
जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर,
इधर शेर था धोखा खाकर, झुंझलाहट में चूर ।
शेर बहुत खिसियाकर बोला, नाव जरा ले रोक,
कलम और कागज तो ले जा रे कायर डरपोक ।
चित्रकार ने कहा तुरंत ही, रखिए अपने पास,
चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास।
– रामनरेश त्रिपाठी
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